June 1, 2023

नेत्रहीन होते हुए भी रवींद्र जैन ने “रामायण” को कर दिया अमर।

संसार में ऐसे बहुत से लोग रहते हैं, जो शारीरिक रूप से पूरी तरह से ठीक हैं। परंतु वह अपने जीवन में कुछ बेहतर नहीं कर पाते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी इस दुनिया में मौजूद हैं, जो अपनी कमजोरियों को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाकर पूरी दुनिया में नाम कमाते हैं। उन्हीं में से एक शख्सियत हैं रवींद्र जैन, जिनके गुणों का बखान जितना किया जाए कम है।रवींद्र जैन बचपन से ही नेत्रहीन थे परंतु उन्होंने बॉलीवुड इंडस्ट्री में अपना भरपूर योगदान दिया। संगीतकार रवींद्र जैन ही वह इंसान थे, जिन्होंने “रामायण” के लिए आइकॉनिक और आउटस्टैंडिंग म्यूजिक दिया था। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से इन शख्सियत रवींद्र जैन से जुड़ी हुई कुछ महत्वपूर्ण बातें बताने जा रहे हैं।

रवींद्र जैन ने “रामायण” को कर दिया अमर।

28 फरवरी 1944 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में जन्मे रवींद्र जैन जन्म से ही नेत्रहीन थे। वह सात भाई-बहनों में तीसरे नंबर के थे। उनके पिताजी का नाम इंद्रमणि जैन था, जो एक संस्कृत पंडित थे। पद्मश्री सम्मानित रवींद्र जैन ने अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के ब्लाइंड स्कूल से शिक्षा प्राप्त की थी। अकादमिक रूप से अध्ययन करने का कोई मौका प्राप्त ना होने की वजह से रवींद्र जैन ने बेहद छोटी उम्र में ही संगीत सीखना शुरू कर दिया था। वह शुरुआत में मंदिरों में भक्ति गीत गाते थे। उन्होंने जीएल जैन, जनार्दन शर्मा और नाथू राम जैसे दिग्गजों की शरण में रहकर संगीत का प्रशिक्षण लिया।

रवींद्र जैन ने अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली, तो उसके बाद वह कोलकाता चले गए थे। उन्होंने वहां पर पांच रेडियो स्टेशनों में एक सिंगर के तौर पर ऑडिशन दिया था परंतु उन्हें रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। उस समय के दौरान रवींद्र जैन के गुरू राधे श्याम झुनझुनवाला एक फिल्म बना रहे थे, जिसमें उन्होंने रवींद्र जैन को संगीत देने के लिए कहा था और साल 1969 में उनको लेकर मुंबई आ गए थे।

आइये जानते है इन्ही ने स्ट्रटिंग कहा से की ।

रवींद्र जैन को बतौर म्यूजिक डायरेक्टर के रूप में काम करने का मौका साल 1973 में राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म “सौदागर” से मिला था। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने किशोर कुमार से फिल्म “चोर मचाए शोर” में “घुंघरू की तरह बजता ही रहा हूं मैं” गीत गवाया था। फिर उन्होंने श्याम तेरे कितने नाम, जब-जब तू मेरे सामने आए, अंखियों के झरोखे से, गीत गाता चल, दुल्हन वही जो पिया मन भाए जैसे गाने गाकर बॉलीवुड को मैलोडियस बना दिया।

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